चलो

कहते थे,
साथ चलो

ये गलियाँ तुम नहीं चीन्हती,
हाथ पकड़, पास चलो

हम कहाँ आ पहुँचे,
तुम भी तनि आज चलो

दूर सही तुम दूर रहो,
चाहे हम से दूर चलो

कहीं थम जायेंगे, मिल जायेंगे,
शायद, इसिलीए चलो

जब साथ नहीं तो क्या गम़,
तुम लौह, एकाकी चलो

हम अपनी,
तुम अपनी राह चलो